पंचांग तत्व
तिथि, योग एवं करण
पंचांग (वैदिक कैलेंडर) प्रतिदिन पाँच तत्वों को ट्रैक करता है: तिथि (चन्द्र दिन), नक्षत्र (चन्द्र नक्षत्र), योग (ग्रह संयोग), करण (अर्ध-तिथि), और वार (सप्ताह का दिन)। ये प्रत्येक दिन की गुणवत्ता निर्धारित करते हैं।
तिथि (चन्द्र दिन)
वैदिक कैलेंडर की 15 चन्द्र कलाएँ
तिथि एक चन्द्र दिन है, जो सूर्य और चन्द्रमा के बीच के कोणीय सम्बन्ध को दर्शाती है। प्रत्येक पक्ष (पखवाड़ा) में 15 तिथियाँ होती हैं, जो एक पूर्ण चन्द्र मास में 30 तिथियाँ बनाती हैं। प्रत्येक तिथि विभिन्न कार्यों के लिए अद्वितीय ऊर्जा रखती है।
योग (ग्रह संयोग)
वैदिक पंचांग के 27 योग
पंचांग के संदर्भ में योग सूर्य और चन्द्रमा के देशांतर के योग को 27 समान भागों में विभाजित करने से प्राप्त होता है। प्रत्येक योग विशिष्ट ऊर्जा रखता है जो विभिन्न कार्यों के लिए समय की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
करण (अर्ध-तिथि)
वैदिक कैलेंडर के 11 करण
करण तिथि का आधा भाग है। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 आवर्ती। प्रत्येक करण लगभग 6 घंटे का होता है और उस अवधि के लिए सबसे उपयुक्त कार्यों की प्रकृति को इंगित करता है।